संदेश

Home remedies for abscess -------: Soak a wash cloth or gauze in one cup of hot water and 2 tablespoon of epsom salt ,apply this compress 3 times a day for 10 to 15 minutes to help relieve the infection. Tea tree ----: Apply tea tree oil in diluted form 3 times a day. Add 10 drops of oil in 1/2 oz of water to make it in a diluted from. Tea tree oil is an effective antibacterial agent . Peppermint Essential oil apply this oil directly to the abscess . It has a antibacterial and antiseptic properties . Garlic ------: apply crushed garlic to the abscess as a poultice , garlic as antibacterial properties.

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1 साल से अधिक आयु वाले बच्चों के दमा के रूप में नित्य तुलसी की पांच पत्तियां खूब बारीक पीसकर थोड़े शहद के साथ प्रातः सायं आवश्यकतानुसार तीन 4 सप्ताह तक चटाएं। 1 साल से कम आयु वाले शिशु को तुलसी का रस दो बूंद (तुलसी की पत्तियां पीसकर स्वच्छ कपड़े में छान कर निकाला गया) तुलसी स्वरस थोड़ी शहद में मिलाकर दिन में दो बार चटायें। बच्चों के दमा के साथ-साथ उनके श्वसन संस्थान अर्थात सांस की अनेक बीमारियां जड़ से दूर हो जाएंगी।

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अजवाइन का काढ़ा यकृत ,तिल्ली, हिचकी ,वमन, मिचली ,खट्टी डकार आना, पेट की गुड़गुड़ाहट ,मूत्र विकार एवं पथरी रोगों का विनाशक है ।इससे मौसम बदलते ही होने वाले ज़ुकाम की शिकायत भी दूर हो जाती है ।ध्यान रहे जिन्हें मूत्र कठिनाई से उतरता हो वह इस काढ़े का सेवन न करें । 125 ग्राम पानी में 1 लोंग डालकर 5 मिनट उबालें तथा फिर नीचे उतारकर ठंडा करके इस खुराक को नित्य पिलाने से पसली चलना, कफ खांसी और निमोनिया में लाभ होता है । एक उपाय यह भी है की 8 बड़े चम्मच (कड़छुल)पानी एक बर्तन में डाल दें और उसमें एक लवंग डाल दें पकते- पकते जब वह पानी एक चम्मच के लगभग रह जाए तब उस पानी को दवा समझ कर रोगी को दे देना चाहिए ,इससे बुखार में आशातीत लाभ मिलता है यह काढ़ा दिन में दो टाइम यानी सवेरे शाम देना चाहिए। लोंग के इस्तेमाल से शरीर के अंदर की वायु नलियों का संकोच तथा विकास और उससे होने वाली पीड़ा नष्ट होती है ।मुह में लॉन्ग रखकर चूसने से खांसी का दौरा कम हो जाता है ,कफ़ आराम से निकलता है ।खांसी दमा सांस रोगों में लॉन्ग के सेवन से लाभ होता है बच्चों के पसली चलने पर -----: दूध में पांच तुलसीकी पत्तियां और एक लॉन्ग उबालकर पिलाने से बच्चों का पसली चलना बंद हो जाता है।

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छाती का दर्द अथवा पसली चलना ------: अजवाइन एक चम्मच को 250 ग्राम पानी में उबालें, चौथाई शेष रहने पर काढ़े को छानकर रात को सोते समय गरम-गरम पीकर ओढ़ कर सो जाएं । दिन में दो बार नियमित पीनेें से पांच सात दिन में छाती का दर्द नष्ट हो जाता है ।यह काढ़ा दो चम्मच की मात्रा से दिन में दो बार निरंतर कुछ दिन देने से पसली चलना भी ठीक हो जाता है। शिशु को सर्दी लगना ------: 6 महीने से 12 महीने की आयु वाले छोटे बच्चों को ठंडे मौसम या ठंडी हवा के कारण सर्दी लग जाए ,छाती में कफ बोले ,छाती में दर्द हो या पसली चले तो आधा कप पानी में 10-12 दानें अजवाइन के डालकर उबालें आधा रहने पर इसे कपड़े से छान लें । यह अजवाइन का काढ़ा थोड़ा गर्म गर्म शिशु को दिन में दो बार अथवा केवल रात में सोने से पहले पिलाएं ।आशातीत लाभ होगा ।इसके अलावा जायफल पत्थर पर पीसकर उसको पैर के नाखूनों के ऊपर लगाने से भी सर्दी ,कफ़ तथा खांसी में बहुत फायदा मिलता है ,जायफल एक गरम मसाला है और यह सर्दी को तुरंत हर लेता है।

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ब्रोंकाइटिस श्वास नली में सूजन एवं दर्द -----: सोंठ, काली मिर्च और हल्दी तीनों वस्तुओं का अलग-अलग पाउडर बना लें ।प्रत्येक को चार चार चम्मच पाउडर लेकर मिला लें, शीशी में भरकर रख लें । 2 ग्राम यानी आधा चम्मच पाउडर गर्म पानी के साथ दिन में दो बार लें। विशेष---: ब्रोंकाइटिस के अतिरिक्त खाँसी, जोड़ों में दर्द ,कमर दर्द ,हिपशूल में लाभदायक है ।आवश्यकता अनुसार 3 दिन से 7 दिन तक ले, पूरा लाभ ना हो तो चार-पांच दिन और ले सकते हैं। छाती का दर्द तथा पसली चलना ------: अजवाइन एक चम्मच को ढाई सौ ग्राम पानी में उबालें चौथाई शेष रहने पर काढे को छानकर रात को सोते समय गरम-गरम पीकर ओढ़ कर सो जाए। दिन में दो बार नियमित पीने से पांच सात दिन में छाती का दर्द नष्ट हो जाता है ।वह काढ़ा दो चम्मच की मात्रा से दिन में दो बार निरंतर कुछ दिन देने से पसली चलना भी ठीक हो जाता है।

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आंवला सूखा और गुलहटी को अलग-अलग बारीक करके पाउडर बना लें ,और मिलाकर रख लें ।इसमें से एक चम्मच पाउडर दिन में दो बार खाली पेट प्रातः सायं सप्ताह 2 सप्ताह आवश्यकतानुसार लें। छाती में जमा हुआ बलगम साफ हो जाएगा ।उपरोक्त चूर्ण में बराबर वजन की मिश्री का पाउडर डालकर मिला लें ।2 ग्राम चूर्ण नित्य लेने से गले के छालों में शीघ्र ही आराम होगा।

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किसी गर्म चीज से अचानक जल जाने से शरीर में फफोले पड़ जाते हैं --इसके घरेलू निम्न उपाय हैं जले हुए भाग को तुरंत पानी के अंदर काफी देर तक हिलाते रहना चाहिए। आलू पीसकर लगाना चाहिए इससे रोगी की जलन बहुत जल्दी ठीक हो जाती है ।शरीर पर किसी भी तरह का घाव या चोट हो जाने पर गोमूत्र और पानी से धोना चाहिए । गेंदे के फूल की पंखुड़ियां हल्दी गोमूत्र की चटनी बनाकर लगाना चाहिए। खूब ठंडा पानी भी उस जली हुई जगह पर कम से कम 5 से 7 मिनट तक गिराते रहना चाहिए ।अगर अधिक जल गया है तो शीघ्र ही डॉक्टर या अस्पताल की सहायता लेनी चाहिए ।जलने के बाद यदि आपकी स्किन पर निशान हो गए हो तो, निशान को दूर करने के लिए हल्दी और मलाई मिलाकर त्वचा पर दिन में दो बार 20- 25 दिन लगाना चाहिए इससे काफी फर्क पड़ता है। एलोवेरा जेल भी बहुत फायदेमंद है।

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बच्चों के मुंह में छाले होने पर मिश्री को बारीक पीसकर उसमें थोड़ा सा कपूर( खाने वाला कपूर मिलाकर) मुंह में लगाए या बुरक दें। मिश्री 8 भाग तो कपूर एक भाग लें। इससे मुंह के छाले और मुंहपाक मिटता है ।यह दवा बच्चों के मुंह आने पर बहुत लाभकारी है।

सेंधा नमक मैदे की तरह बारीक पीसकर कपट छान कर लें ।यह नमक एकदम बारिक होना चाहिए। ऐसा नमक 2 ग्राम हथेली पर रखकर उस से 4 गुना सरसों का तेल डालकर उसे मिलाएं। उस नमक मिले तेल से धीरे-धीरे दांतों और मसूड़ों की भली प्रकार मालिश रोजाना प्रात काल करें । दांतों से खून निकले तो निकलने दीजिए , इस तरह इस तेल का दतवन करने से यानी लगातार कुछ दिन तक दांत साफ करने से दातों में गर्म और ठंडा लगना धीरे-धीरे बंद हो जाता है ।दांतो की मालिश करने पर के बाद मुंह में कुल्ला करके मुंह को भली प्रकार धो लें ।इससे दांत साफ होते हैं ,दांत के कीड़े नष्ट होते हैं पायरिया भी नष्ट हो जाता है और समस्त दांतो के रोगों से बचाव मिलता है।

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प्याज का रस तनिक सा गर्म करके दो-तीन बूंद कान में डालने से कान का दर्द तुरंत दूर होता है ।प्याज को कूट पीसकर मलमल के कपड़े से निचोड कर रस निकाले, और इस प्याज के रस को थोड़ा सा गर्म करके सुहाता सुहाता दो-तीन बूंद कान में डालें ।कान का कैसा भी दर्द होगा आराम मिलेगा ,इससे ऊंचा सुनना, काम में भिनभिनाहट, शांय-शांय की आवाज, कान का बहना आदि रोगों में लाभ मिलता है ।कान के कीड़े भी नष्ट होते हैं।

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लहसुन की एक गांठ में से दो कली लेकर छिलका और झिल्ली उतार लें, दो चम्मच सरसों के तेल में डालकर हल्की आंच पर गर्म करने के लिए रख दें। जब लहसुन जलने लगे और काला पड़ने लगे , तो तेल की कटोरी आगसे उतार कर ,तेल को कपट छान कर लें । निकले हुए गुनगुने तेल को रुई के फाहे से कान में सुहाता सुआता दो-चार बूंद डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है ।यदि कान में कीड़ा चला गया है तो वह मर कर अपने आप बाहर निकल आता है और दर्द बंद हो जाता है । यदि कान बहता हो तो लहसुन के साथ नीम की 10-15 पतियों को भी तेल में उबाल लें । इसकी दो बूंद रात में सोने से पहले डालते रहने से कान का जख्म और बहना ठीक हो जाता है।

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खजूर की खीर :- खजूर की गुठलियाँ निकालकर साफ पानी से धोकर, 5-7 खजूर 150 ग्राम दूध में मिलाकर मन्द आंच पर पकने रख दें । 8--10 मिनट बाद खजूर गल जाने पर दूध नीचे उतार लें, और खजूरों को दूध में से निकालकर चबा चबा कर खा लें , ऊपर से पीने लायक गर्म दूध पी लें । यह सस्ता सर्वगुण युक्त महा शक्ति वर्धक योग है । खजूर की खीर खाने से वजन तो बढ़ता ही है ,साथ ही कब्ज और क्षयरोग का नाश भी होता है ।पेट के अनेक रोग दूर होते हैं ।खजूर आमाशय और हृदय को बल देता है। नया रक्त उत्पन्न करता है ,सूखी खांसी और दमा में लाभ करता है । छाती के रोगों में भी लाभ पहुंचाता है ,तपेदिक अतिसार संग्रहणी और बहू मूत्र में भी लाभदायक है ।सुबह या रात सोने से पूर्व प्रतिदिन एक बार दो-तीन सप्ताह से तक 40 दिन तक सेवन करें।

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रात में 10-12 मुनक्का धोकर भिगो दें ।1-2 घंटे भीगने के बाद मुनक्का के बीज निकालकर खूब चबा चबाकर खाएं, 2- 4 सप्ताह के सेवन से ही खून में वृद्धि होती है । इस प्रयोग से खून साफ भी होता है और नाक से बहने वाला खून भी बंद होता है ,मुनक्का वीर्य वर्धक है तथा पेट और फेफड़ों के रोगों में लाभदायक है।

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शतावरी को पीसकर कपटछान करके इस चूर्ण को 3 ग्राम (एक चम्मच )की मात्रा से फांककर ऊपर से एक गिलास दूध पीने से वीर्य वृद्धि और वीर्य पुष्ट होकर खूब शक्ति बढ़ती है ।इसे प्रातः एवं रात्रि सोते समय निरंतर 40 दिन से 2 महीने तक सेवन करना चाहिए इस रसायन के सेवन से नेत्र ज्योति बढ़कर चश्मा उतर सकता है शतावरी का सेवन करते समय, बहुत ध्यान से इसके फायदे और नुकसान की जानकारी अवश्य ले लें।

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तुलसी के बीज आधा ग्राम (पीसे हुए ) सादे - केवल कत्था चूना लगाए पान के साथ, नित्य सुबह और शाम खाली पेट खाने से वीर्य पुष्टि एवं एवं रक्त शुद्धि होती है ।जो लोग पान नहीं खाते हैं, वे एक भाग तुलसी के बीज का चूर्ण , उससे दुगना पुराने गुड़ में मिलाकर ले सकते हैं ।इसे 10 से 40 दिन तक लेना चाहिए ।तुलसी के बीज बहुत गर्म होते हैं, इसलिए यह प्रयोग केवल शीतकाल में ही करना चाहिए शीत ऋतु अर्थात दिसंबर जनवरी में इसका प्रयोग करना चाहिए । इसका सेवन करने से नपुंसकता का रोग नाश होता है ,और धातु पुष्ट होता है । आयुर्वेद में 7 धातुओं के नाम इस प्रकार है ~1रस -लाज्मा,2 रक्त- खून या ब्लड, 3- मांस -मांसपेशियां , 4-मेद -वसा या (फैट), 5-अस्थि -हड्डियां , 6-मज्जा- बोन- मेरो , 7-शुक्र -प्रजनन संबंधी ऊतक इंसानों को 'धातु' कहा जाता है और धातु पुष्टि के लिए उपर्युक्त सेवन बताया गया है।

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25-30 किशमिश लेकर प्रात: काल गर्म पानी से धोकर साफ कर ले ,फिर उन्हें कच्चे दूध में डुबो दें आधे घंटे बाद उस दूध को स्किशमिश सहित उबालें। दूध ठंडा करने के बाद में पहले किशमिश एक-एक करके चबाकर खा ले और ऊपर से गर्म दूध पी लें। इससे रक्त वृद्धि होगी ,जिन्हें सर्दियों में बहुत ठंड का अनुभव होता है और शीत के मारे दोहरे होते जाते हैं ,स्नान करने का दिल कई- कई सप्ताह नहीं करता है। उनकी यह अधिक ठंड महसूस होने की शिकायत ,इस प्रयोग को करने से ,कुछ ही दिनों में दूर हो जाएगी। पुरानी बीमारी ,अधिक कमजोरी, लो ब्लड प्रेशर, यकृत की खराबी ,बदहजमी में किशमिश चिकित्सा बहुत लाभप्रद है।

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500 ग्राम दूध में दो स्वच्छ उत्तम छुहारे डालकर उबालें। लगभग आधा रहने पर दो चम्मच मिश्री या खांड मिलाकर पीने लायक दूध ठंडा कर लें । सर्दी में तो केवल छुहारे का दूध मात्र पी लेना पर्याप्त होता है ।छुहारे के सेवन से मांस ,बल ,वीर्य बढ़ता है । छुहारा रक्त बनाता है और शरीर को मोटा करता है ।फेफड़ों और छाती को बल देता है तथा जुकाम कफ में लाभदायक है। कब्ज हटाकर पेट साफ करता है ।आयुर्वेद के अनुसार छुहारा खाने में मधुर और वीर्य बल दायक है ।यह अकेला ही अनेक रोगों को सदैव के लिए दूर करने में समर्थ है वात पित्त दूर करने वाला कब्ज निवारक, नाड़ी बल दायक, ज्वर ,जलन, मस्तिष्क की दुर्बलता ,बार बार उल्टी होना, अतिसार (दस्त)ठीक करता है, खुलकर मूत्र ना आना ,कमर में दर्द आदि का निवारण करने के लिए यह बहुत अधिक सक्षम है।

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साफ किए हुए गुठली रहित छुहारे एक भाग, सूखे नारियल गोला की (गिरी )2 भाग यानि दुगुनी मात्रा में, मिश्री 3 भाग यानी छुहारे से तीन गुना, लेकर इनके अलग-अलग छोटे टुकड़े कर लें और मिलाकर रख दे ।बस यह बच्चों के लिए स्वादिष्ट और स्वास्थ्य परक नाश्ता तैयार है बच्चों को टॉफी, चॉकलेट, चिंगम ,आदि के स्थान पर दो दो चम्मच रोजाना इसे नाश्ते के समय दे दे ।इसे खाने के बाद तत्काल पानी नहीं पीना चाहिए ,इससे बच्चों के दांत खराब होना, टॉन्सिल बढ़ ना ,बार बार सर्दी लगना ,जुखाम होना ,पाचन शक्ति कमजोर होने की शिकायत ,नहीं रहेगी। सर्दियों में यह विशेष उपयुक्त है।

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दो अखरोट की गिरियां, 4 बादाम रात में पानी में भिगो दें तथा 7 नग मुनक्का बीज निकाले हुए , इन तीनों को नित्य प्रातः खूब चबाकर या पीसकर खाने से ,ऊपर से ढाई सौ ग्राम मिश्री युक्त दूध पीने से वृद्धों की शारीरिक और मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है ।लगातार सेवन करने से बूढों में भी जवानों जैसा जोश उत्पन्न हो जाता है ।विशेष :-यदि कब्ज हो तो इस नाश्ते में दो-तीन अंजीर भी मिला लें।

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प्रतिदिन 2~3 सूखे उत्तम अंजीर खाकर ऊपर से 250 ग्राम दूध जिसमें चीनी की जगह मिश्री मिलाकर पी लेना चाहिए। मिश्री मिला दूध अत्यंत शक्तिवर्धक होता है ।इसे लगातार 2- 3 सप्ताह लेना चाहिए। अंजीर मिले दूध पीने से कब्ज -नाशक , पित्तनाशक, रक्त -रोग निवारक, वायु विकार दूर करने वाला है ।इसके सेवन से शरीर में सदैव थकावट सी महसूस होना , नींद सी बनी रहना ,किसी कार्य में मन नहीं लगना आदि शिकायतों में लाभ होता है। अंजीर खून बढ़ाता है ,बलगम निकालता है ,रंग निखरता है ,दमा एवं क्षय रोग कफ की उत्पत्ति रोकने में तथा शक्ति बढाने में अंजीर का सेवन लाभप्रद है। 2-3 अंजीर सुबह भिगोकर रात में खाने से और रात में भिगोकर सुबह खाने से हर प्रकार का बवासीर दूर होता है इसके लिए निरंतर 1 माह तक सेवन करना चाहिए।अंजीर को खूब चबा -चबा कर खाना चाहिए।

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