आंवला के मुरब्बा को बनाने की सर्वोत्तम विधि 500 ग्राम स्वच्छ हरे आंवले कद्दूकस करके उनका गूदा किसी कांच के मर्तबान में डाल दें गुठली निकाल कर फेंक दे ।अब इस गूदे में इतना शहद डालें की गूदा शहद से तर हो जाए , इसके बाद उस कांच पर ढक्कन लगा दे । उसे 10 दिन तक लगातार चार-पांच घंटे धूप में रखें , इस प्रकार प्राकृतिक तरीके से मुरब्बा बन जाएगा। बस 2 दिन बाद ही इसे खाने के काम में लाया जा सकता है। इस विधि से किया तैयार किया गया मुरब्बा स्वास्थ्य की दृष्टि से श्रेष्ठ है , आग की बजाय सूर्य की किरणों से निर्मित होने के कारण इसके गुण धर्म नष्ट नहीं होते हैं और शहद में रखने से इसकी शक्ति बढ़ जाती है। इस मुरब्बा का एक नग प्रतिदिन गर्मियों में खाली पेट खूब चबा चबाकर खाने से और उसके 1 घंटे बाद तक कुछ भी न लेने से स्नायु संस्थान शक्तिशाली बनता है। गर्मी के मौसम में इसका सेवन अधिक लाभकारी है आंवला का मुरब्बा शीतल और तर होता है ।आंखों लिए हितकारी रक्तशोधक तथा कफ संबंधी सभी प्रकार के रोगों का नाशक है । सवेरे उठते ही जो सिर दर्द चालू हो जाता है तथा चक्कर आने की शिकायत होती है वह इस आंवले की सेवन करने से काफी हद तक दूर हो जाती है । सवेरे चाय बिस्कुट की जगह अगर इस आंवले का निरंतर सेवन किया जाए तो फायदा आपके सामने होगा, मधुमेह रोगियों के लिए यह वर्जित है गर्भवती स्त्रियों के लिए यह बहुत ही लाभकारी है।