अजवाइन का काढ़ा यकृत ,तिल्ली, हिचकी ,वमन, मिचली ,खट्टी डकार आना, पेट की गुड़गुड़ाहट ,मूत्र विकार एवं पथरी रोगों का विनाशक है ।इससे मौसम बदलते ही होने वाले ज़ुकाम की शिकायत भी दूर हो जाती है ।ध्यान रहे जिन्हें मूत्र कठिनाई से उतरता हो वह इस काढ़े का सेवन न करें । 125 ग्राम पानी में 1 लोंग डालकर 5 मिनट उबालें तथा फिर नीचे उतारकर ठंडा करके इस खुराक को नित्य पिलाने से पसली चलना, कफ खांसी और निमोनिया में लाभ होता है । एक उपाय यह भी है की 8 बड़े चम्मच (कड़छुल)पानी एक बर्तन में डाल दें और उसमें एक लवंग डाल दें पकते- पकते जब वह पानी एक चम्मच के लगभग रह जाए तब उस पानी को दवा समझ कर रोगी को दे देना चाहिए ,इससे बुखार में आशातीत लाभ मिलता है यह काढ़ा दिन में दो टाइम यानी सवेरे शाम देना चाहिए। लोंग के इस्तेमाल से शरीर के अंदर की वायु नलियों का संकोच तथा विकास और उससे होने वाली पीड़ा नष्ट होती है ।मुह में लॉन्ग रखकर चूसने से खांसी का दौरा कम हो जाता है ,कफ़ आराम से निकलता है ।खांसी दमा सांस रोगों में लॉन्ग के सेवन से लाभ होता है बच्चों के पसली चलने पर -----: दूध में पांच तुलसीकी पत्तियां और एक लॉन्ग उबालकर पिलाने से बच्चों का पसली चलना बंद हो जाता है।

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