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1 साल से अधिक आयु वाले बच्चों के दमा के रूप में नित्य तुलसी की पांच पत्तियां खूब बारीक पीसकर थोड़े शहद के साथ प्रातः सायं आवश्यकतानुसार तीन 4 सप्ताह तक चटाएं। 1 साल से कम आयु वाले शिशु को तुलसी का रस दो बूंद (तुलसी की पत्तियां पीसकर स्वच्छ कपड़े में छान कर निकाला गया) तुलसी स्वरस थोड़ी शहद में मिलाकर दिन में दो बार चटायें। बच्चों के दमा के साथ-साथ उनके श्वसन संस्थान अर्थात सांस की अनेक बीमारियां जड़ से दूर हो जाएंगी।
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अजवाइन का काढ़ा यकृत ,तिल्ली, हिचकी ,वमन, मिचली ,खट्टी डकार आना, पेट की गुड़गुड़ाहट ,मूत्र विकार एवं पथरी रोगों का विनाशक है ।इससे मौसम बदलते ही होने वाले ज़ुकाम की शिकायत भी दूर हो जाती है ।ध्यान रहे जिन्हें मूत्र कठिनाई से उतरता हो वह इस काढ़े का सेवन न करें । 125 ग्राम पानी में 1 लोंग डालकर 5 मिनट उबालें तथा फिर नीचे उतारकर ठंडा करके इस खुराक को नित्य पिलाने से पसली चलना, कफ खांसी और निमोनिया में लाभ होता है । एक उपाय यह भी है की 8 बड़े चम्मच (कड़छुल)पानी एक बर्तन में डाल दें और उसमें एक लवंग डाल दें पकते- पकते जब वह पानी एक चम्मच के लगभग रह जाए तब उस पानी को दवा समझ कर रोगी को दे देना चाहिए ,इससे बुखार में आशातीत लाभ मिलता है यह काढ़ा दिन में दो टाइम यानी सवेरे शाम देना चाहिए। लोंग के इस्तेमाल से शरीर के अंदर की वायु नलियों का संकोच तथा विकास और उससे होने वाली पीड़ा नष्ट होती है ।मुह में लॉन्ग रखकर चूसने से खांसी का दौरा कम हो जाता है ,कफ़ आराम से निकलता है ।खांसी दमा सांस रोगों में लॉन्ग के सेवन से लाभ होता है बच्चों के पसली चलने पर -----: दूध में पांच तुलसीकी पत्तियां और एक लॉन्ग उबालकर पिलाने से बच्चों का पसली चलना बंद हो जाता है।
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छाती का दर्द अथवा पसली चलना ------: अजवाइन एक चम्मच को 250 ग्राम पानी में उबालें, चौथाई शेष रहने पर काढ़े को छानकर रात को सोते समय गरम-गरम पीकर ओढ़ कर सो जाएं । दिन में दो बार नियमित पीनेें से पांच सात दिन में छाती का दर्द नष्ट हो जाता है ।यह काढ़ा दो चम्मच की मात्रा से दिन में दो बार निरंतर कुछ दिन देने से पसली चलना भी ठीक हो जाता है। शिशु को सर्दी लगना ------: 6 महीने से 12 महीने की आयु वाले छोटे बच्चों को ठंडे मौसम या ठंडी हवा के कारण सर्दी लग जाए ,छाती में कफ बोले ,छाती में दर्द हो या पसली चले तो आधा कप पानी में 10-12 दानें अजवाइन के डालकर उबालें आधा रहने पर इसे कपड़े से छान लें । यह अजवाइन का काढ़ा थोड़ा गर्म गर्म शिशु को दिन में दो बार अथवा केवल रात में सोने से पहले पिलाएं ।आशातीत लाभ होगा ।इसके अलावा जायफल पत्थर पर पीसकर उसको पैर के नाखूनों के ऊपर लगाने से भी सर्दी ,कफ़ तथा खांसी में बहुत फायदा मिलता है ,जायफल एक गरम मसाला है और यह सर्दी को तुरंत हर लेता है।
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ब्रोंकाइटिस श्वास नली में सूजन एवं दर्द -----: सोंठ, काली मिर्च और हल्दी तीनों वस्तुओं का अलग-अलग पाउडर बना लें ।प्रत्येक को चार चार चम्मच पाउडर लेकर मिला लें, शीशी में भरकर रख लें । 2 ग्राम यानी आधा चम्मच पाउडर गर्म पानी के साथ दिन में दो बार लें। विशेष---: ब्रोंकाइटिस के अतिरिक्त खाँसी, जोड़ों में दर्द ,कमर दर्द ,हिपशूल में लाभदायक है ।आवश्यकता अनुसार 3 दिन से 7 दिन तक ले, पूरा लाभ ना हो तो चार-पांच दिन और ले सकते हैं। छाती का दर्द तथा पसली चलना ------: अजवाइन एक चम्मच को ढाई सौ ग्राम पानी में उबालें चौथाई शेष रहने पर काढे को छानकर रात को सोते समय गरम-गरम पीकर ओढ़ कर सो जाए। दिन में दो बार नियमित पीने से पांच सात दिन में छाती का दर्द नष्ट हो जाता है ।वह काढ़ा दो चम्मच की मात्रा से दिन में दो बार निरंतर कुछ दिन देने से पसली चलना भी ठीक हो जाता है।
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आंवला सूखा और गुलहटी को अलग-अलग बारीक करके पाउडर बना लें ,और मिलाकर रख लें ।इसमें से एक चम्मच पाउडर दिन में दो बार खाली पेट प्रातः सायं सप्ताह 2 सप्ताह आवश्यकतानुसार लें। छाती में जमा हुआ बलगम साफ हो जाएगा ।उपरोक्त चूर्ण में बराबर वजन की मिश्री का पाउडर डालकर मिला लें ।2 ग्राम चूर्ण नित्य लेने से गले के छालों में शीघ्र ही आराम होगा।
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