इमली के बीज की गिरी (बीज) को पत्थर पर चंदन की तरह घिसकर , गुहेरी या फुंसी पर लेप करने से तत्काल ठंडक मिलती है । कुछ ही घंटों में रोग का नामोनिशान नहीं रहता है ।इससे यह रोग ही नहीं नष्ट होता बल्कि भविष्य में पुनः नहीं होता है । इमली के बीज का प्रयोग लाने से पहले 3 दिन पानी में भिगोकर छिलका उतार कर रख लेना चाहिए बिच्छू के काटने पर भी छिल्का उतारा एक बीज का सफेद भाग पानी में घिसकर दंश के स्थान पर लगाते हैं, यह चिपक जाएगा और चूस कर ही उतरेगा। जिस स्थान पर बार-बार फुंसी उठ रही है वहां धूप में खाली हथेली पर तर्जनी उंगली को इतना घिसें कि उसमें गर्मी आ जाए ,उंगली गर्म होने पर फिर उस उंगली से बार-बार फुंसी सिकाई करें यही क्रिया कई बार करने से फुंसि या गुहेरी में आराम मिलता है बार-बार फुंसी निकलना बंद करने के लिए प्रातः~ सायं 3 ग्राम त्रिफला का चूर्ण गाय के दूध से लें । इससे बार-बार आंख की फुंसी निकलना बंद हो जाएगा सप्ताह 2 सप्ताह तक इसी प्रकार ले ।अपने गुप्तांग की सदैव ठीक से सफाई रखें।

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